"हौसले के तरकश में,
कोशिश का वो तीर ज़िंदा रखो..
हार जाओ चाहे जिन्दगी मे सब कुछ,
मगर फिर से जीतने की उम्मीद जिन्दा रखो!"
सुप्रभात जी

कमियाँ तो मुझमें भी बहुत है,
पर मैं बेईमान नहीं।
मैं सबको अपना मानता हूँ,
सोचता हूँ फायदा या नुकसान नहीं।
एक शौक है शान से जीने का,
कोई और मुझमें गुमान नहीं 
छोड़ दूँ बुरे वक़्त में अपनों का साथ,
वैसा तो मैं इंसान नहीं।

आप के साथ आप के लिए हमेशा, सुभप्रभात जी

बुझी हुई शमा फिर से जल सकती है,
तूफानों मे घिरी कश्ती फिर किनारे लग सकती है,
मायूस ना होना जिंदगी मे कभी ए दोस्त,
यह किस्मत है जो कभी भी बदल सकती है…  
 
 सुभप्रभात जी

जिसे निभा न सकूँ,  ऐसा वादा नही करता , मैं बातें औकात से,  ज्यादा नहीं करता..!
 तमन्ना रखता हूं,  आसमान छू लेने की ,,, पर औरो को गिराने का,  इरादा नहीं करता....!     
सुभप्रभात जी।

माना दुनियाँ बुरी है साहब,सब जगह धोखा ही धोखा है,

लेकिन हम तो अच्छे बने साहब ,हमें क्या किसी ने रोका है !

सुप्रभात जी

जरूर कोई तो लिखता होगा...
कागज और पत्थर का भी नसीब...

वरना ये मुमकिन नहीं की...
कोई पत्थर ठोकर खाये और कोई पत्थर भगवान बन जाये..

और...

कोई कागज रद्दी और कोई कागज _
गीता और कुरान बन जाये"...!
सुप्रभात्।।

।तूलसी वृक्ष ना जानिए,
 गाय ना जानिए ढोर।।
।।माता-पिता मनुष्य ना जानिए,
 ये तीनों नन्द किशोर।।

अर्थात: तूलसी को कभी वृक्ष नहीं
समझना चाहिए, और गाय को कभी
पशु ना समझे, तथा माता-पिता को
कभी मनुष्य ना समझें, क्योंकि ये तीनो
तो साक्षात भगवान का रूप हैं।

      सुप्रभातम्

समय ही जीवन है।
समय को बर्बाद करना 
अपने जीवन को बर्बाद करने के समान है। 
समय का ध्यन रखिये और उन्नति की ओर बढ़िये। सुप्रभात

मिलों दूर लोगो की हँसी ख़ुशी तो हम देख रहे हैं पर बगल के कमरे में किसी का कराहना दिखता नही।

वाह रे फेसबुक, वाह रे व्हाट्सऐप.. 

फेसबुक व्हाट्सऐप खूब चलाये, लेकिन इस व्यस्तता में अपनों और अपने आप को ना भूल जय। सुप्रभात।

जब तक आप प्रयत्न करना बंद न कर दे, अंतिम परिणाम घोषित नही किया जा सकता। 
अब हमें सोचना हैं के प्रयत्न जीत मिलने तक करना है या .......????
सुभप्रभात

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